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तहज़ीब के नाम पर बंदिशे

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  #यूँही ............................................................... ""तहज़ीब के नाम पर बंदिशे लगायी गयी हम लड़कियां है हर बार बात बस यही बतायी गयी। ................................................................... ""पायल की छनकती, शोख़ आवाजें बारिश की बूंदों के साथ अठखेलियां कर रही थी........ बिलकुल बेपरवाह-सी,मगन होकर, स्वच्छंद बढ़े जा रही थी गलियों में जैसे बारिश का पानी बहे जा रहा था बेपरवाह,बेतरतीब सा....... नन्हे-नन्हे कदमो के निशाँ गीली मिट्टी पर मासूमियत छोड़े जा रहे थे और हाथों में कागज की नाव मानो उसके बचपन को पुरा कर रहे थे...। तभी कड़कती रौबदार-सी आवाज़ बारिशों के खिलखिलाहट को चीरते हुवे गूँजी--"छवि अंदर आ, ऐसे "लड़कियों" को बाहर घूमना 'शोभा' नही देता..." और.... "बचपन को समेटते वो अंदर आगयी...............। ‌ #Preeति You can also read my poetry on my Facebook wall- https://www.facebook.com/unheardPreeti/ I'm on Instagram as @unheardpreeti

माँ के चावल और मेरी ख़्वाहिशें

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माँ सालों से चावल चुना करती थी और मैं ख़्वाहिशें माँ उन चावलों को ड्रम में रखा करती थी बड़े जतन से उनमें नीम की पत्तियां मिलाती और भी कई तरीके अपनाती की उसके चुने चावल अगले साल तक महफ़ूज रहे फिर माँ उनसे हर दोपहर तो कभी रात के पहर में थाली में चावल के प्यार परोसती।। और मैं.. मैं भी उन ख़्वाहिशों को जतन से बचपन के बक्शे में तो कभी आंखों में सजा कर रखतीं.. ये सोचकर कि एक दिन मैं भी जिंदगी के थाल में ख़्वाहिशों को हकीक़त बनाकर सजाऊँगी पर ख़्वाहिशों से ज्यादा जरूरतें जिद्दी थी जरूरतें जीतती गयी  और ख़्वाहिशें हारती गयी।। #Preeति You can also read my poetry on my Facebook wall- https://www.facebook.com/unheardPreeti/ I'm on Instagram as @unheardpreeti

"इश्क़ इत्र"

ख़्वाहिशों का अजब सा शोर है एक रूठता है,इक मनाता है इश्क में हर शख़्श, अपना ज़ोर आजमाता हैं।। दिल चीज ही ऐसी है इक का टुटता है, तो एक का जुड़ता हैं कोई हँसता ही जाता है, कोई रोता ही रहता है इश्क है ये इश्क में हर रंग आजाता है।। छोड़ कोई जाता है कोई ताउम्र साथ निभाता है इंतजार में कोई रहता है कोई इकरार कर जाता है इश्क दरिया हैं सबको बहा कर लेजाता है।। जली पड़ी है दुनियां इश्क के आग में हर आशिक यहाँ मदहोश नजऱ आता है इश्क इत्र है,हर ओर फैल जाता है। इश्क इत्र है, हर ओर फैल जाता है ।। #Preeति You can also read my poetry on my Facebook wall- https://www.facebook.com/unheardPreeti/ I'm on Instagram as @unheardpreeti

"द्वन्द"

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कितना किसका किस्सा कौन किसका हिस्सा रात की चाँदनी के खूंटे पर टंगे ना जाने कितने ऐसे सवाल...।। जवाब ढूंढ़ता इंसान या ख़ुद सवालों-सा इंसान वो खूंटी वहीं सवाल लिए बोझ सी रही सीने पर रात के सुलझ जाए तो ख्वाब हो उलझ जाए तो हक़ीक़त चंद फासलों पर खड़ी रात और दिन की ज़िंदगी कोई दिन में रात -सा कोई रात में दिन सा कौन कितना है 'अंदर' कौन कितना है 'बाहर' रात की खूँटी पर टंगे ना जाने कितने ऐसे सवाल.....।। #Preeति You can also read my poetry on my Facebook wall- https://www.facebook.com/unheardPreeti/ I'm on Instagram as @unheardpreeti